शहीदों के सपनों आदर्शो को लेकर चौरीचौरा के शताब्दी वर्ष पर शहीदों से मिलने पहुँचे यात्री

मुंशी प्रेमचंद के पैतृक गाँव लमही वाराणसी से निकली जन अधिकार चेतना यात्रा पाँचवें दिन मुंशी प्रेमचंद के दूसरे घर बेतिया हाटा गोरखपुर पंहुची,

गोरखपुर । एक देश समान शिक्षा अभियान एवं आशा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गयी 7 दिवसीय जन अधिकार चेतना यात्रा का ऐतिहासिक स्मारक चौरी चौरा और मुंशी प्रेमचंद के बेतिया हाटा स्थित घर पहुंचने पर गर्मजोशी से स्वागत किया गया. मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर 31 जुलाई को उनके गांव वाराणसी के लमही से प्रारंभ हुयी यह यात्रा 10 जिलों में लगभग 800 किलोमीटर की दूरी तय करके 6 अगस्त हिरोशिमा दिवस पर सारनाथ में भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ सम्पन्न होगी ।

गोरखपुर जनपद में यात्रा के आगमन पर पिपराईच, गोरखपुर शहर, पादरी बाज़ार चौराहा, मुंशी प्रेमचंद पार्क, चौरी चौरा शहीद स्मारक आदि कई स्थानों पर नुक्कड़ सभाए एवं संवाद का आयोजन किया गया. यात्रा के बारे में बताते हुए संयोजक दीन दयाल सिंह ने कहा कि इस यात्रा के माध्यम से हम बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अधिकार और खेती किसानी से जुड़े मौलिक सवालों पर संवाद करते हुए हम इसे आमजन की आवाज बनाना चाहते हैं जिससे ये सवाल तमाम राजनैतिक पार्टियों और चुनाव में आने वाले प्रत्याशियों तक पहुंचे और वे इसके प्रति संवेदनशील बन सकें सदन में जाने पर उनकी कोई जवाबदेही सुनिश्चित हो ।

इस अवसर पर जन आंदोलनों के राष्ट्रीय समन्वय के वरिष्ठ सदस्य अरविन्द मूर्ति ने कहा कि जिन सपनों आदर्शों को लेकर अंग्रेज़ों की ग़ुलामी से भारत को आज़ाद को आज़ाद कराते हुए गैर बराबरी मुक्त समाज बनाने के लिए इस शहीद स्मारक पर लिखे नामों वाले हमारे पूर्वजों से हम प्रेरणा लेने आए हैं और उनके आदर्शों को ज़िंदा रखेंगे कहाकि देश में शिक्षित युवा रोजगार गारंटी कानून की आवश्यकता जिसके तहत हर युवा को उसकी योग्यता के अनुसार सम्मानजनक रोजगार का अवसर मिलना सुनिश्चित हो. निजी क्षेत्र में कर्मचारियों के शोषण पर प्रभावी नियंत्रण की व्यवस्था होनी चाहिए. बुनकर, हस्तकला जरदोजी, कारीगर, काष्ठ उद्योग सहित सभी कुटीर उद्योग में लगे परिवारों को सामाजिक सुरक्षा के साथ ही उनके व्यवसाय में उत्पादन की लागत एवं विक्रय की व्यवस्था में सरकार विशेष संरक्षण प्रदान करे. हस्तकला उत्पादों एवं खादी को जीएसटी से मुक्त रखा जाय ।

सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता ने कहा कि जनता को शिक्षा, स्वास्थ्य रोजगार और खेती किसानी जैसे मुद्दे पर अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, राजनैतिक दल के कार्यकर्ताओं, संभावित प्रत्याशियों तक पहुंचाने और उन्हें इसे लागू करने के लिए अपने स्तर से प्रयास करने के लिए प्रेरित करना चाहिए. शिक्षा का अधिकार अभियान के संयोजक अजय पटेल ने कहा कि सभी के लिए गुणवत्ता पूर्ण समान शिक्षा की नीति पूरे देश में व्यावहारिक रूप से लागू की जाए. कोठारी आयोग की रिपोर्ट को लागू किया जाए. शिक्षा का सरकारीकरण किया जाये सभी सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर केन्द्रीय विद्यालयों के समकक्ष होना सुनिश्चित कराया जाय. के. जी. से पी. जी. तक उच्च स्तरीय शिक्षा मुफ्त एवं मातृभाषा में उपलब्ध हो ।

मनरेगा मजदूर यूनियन के संयोजक सुरेश राठौर ने कहा कि फसल बीमा योजना समाप्त कर दी जाय, इसके बजाय प्रत्येक खेत की प्राकृतिक आपदा से हुई हानि की 100 प्रतिशत भरपाई सुनिश्चित हो. सूखा, ओला, पाला, कीट, बाढ़ जैसे सभी कारण शामिल किये जांय. किसानों की सम्पूर्ण फसल की शासकीय खरीद की गारंटी हो, खदान मजदूर यूनियन के संयोजक महेंद्र राठौर ने कहा कि देश में स्वास्थ्य का अधिकार कानून बने पंचायत स्तर पर अनिवार्य रूप से स्वास्थ्य केंद्र बनाएं जाएँ और इनमे उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ साथ पैथोलॉजी जांच की भी सुविधा उपलब्ध हो. पंचायत स्तर पर ग्रामीण एम्बुलेंस सेवा की उपलब्धता हो ।

यात्रा दल का स्वागत करते हुए स्थानीय लोगों ने कहा कि शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और खेती के मुद्दे आम जनता से जुड़े हुए हैं, इन पर सरकारें प्रायः बहुत इमानदार नही दिखती हैं, जनता को जागरूक होकर अब इन मुद्दों पर सवाल खड़े चाहिए, जन अधिकार चेतना यात्रा इस मामले में आम जनता को चैतन्य करने के अपने उद्देश्य में सफल रही है. सामाजिक गीतों के रचनाकार होशिला यादव ने भावपूर्ण जनवादी गीतों के माध्यम से समाज को और बेहतर बनाने का सन्देश दिया. यात्रा दल यात्रा में 12 सदस्य दीन दयाल, अजय पटेल, महेंद्र राठौर, मनोज कुमार, श्रद्धा पटेल, कुसुमलता पटेल, दिव्या पांडेय, राजकुमार गुप्ता, अरविंद मूर्ति, प्रियंका वर्मा, हौशिला यादव, शामिल हैं. कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अब्दुल हमीद, राम करन, शेखर सिंह, जैशान, सृष्टि सिंह, सत्या पांडे, मनोज कुमार सिंह, सुजीत, रीता, मेर्सी, अनिता, की उपस्थिति रही ।

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