ग्रेटर नोएडा में 7725 करोड़ के निवेश से बनेगा मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब

यूपी के विकास की नई गाथा लिखेगा विश्वस्तरीय मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब , बोड़ाकी रेलवे स्टेशन से 15 ट्रेनें भी चलेंगीं, एमएमटीएच में आईएसबीटी, मेट्रो और होटल आदि की सुविधाएं होंगी उपलब्ध .

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में ग्रेटर नोएडा जल्द ही विश्व स्तरीय मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स का हब बनने वाला है। 7725 करोड़ के निवेश से बनने वाले मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (एमएमएलएच) और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (एमएमटीएच) आने वाले समय में यूपी के विकास की नई गाथा लिखेंगे। इससे लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी। साथ ही एक ही स्थान पर यात्रियों के लिए रेल, सड़क और मेट्रो की सुविधाएं भी उपलब्ध होंगीं।

इस प्रोजेक्ट के लिए ग्रेटर नोएडा में एक नए प्राधिकरण इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप ऑफ ग्रेटर नोएडा लिमिटेड (आईआईटी जीएनएल) का गठन किया गया है। दादरी के पास 750 एकड़ भूमि में प्रोजेक्ट को पूरा करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और दोनों परियोजनाओं के लिए करीब 85 फीसदी भूमि का अधिग्रहण भी हो चुका है। उत्पादों को रखने के लिए वेयर हाउसिंग से लेकर कोल्ड स्टोरेज सहित अन्य सुविधाएं भी मिलेंगीं। पूरे क्षेत्र को फ्रेट विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है। आईआईटी जीएनएल के सीईओ नरेंद्र भूषण ने बताया कि ग्रेटर नोएडा अथारिटी दफ्तर से मात्र तीन किमी की दूरी पर बोड़ाकी रेलवे स्टेशन है और आने वाले समय में यहां से 15 ट्रेनें भी चलेंगीं, जिससे यात्री देश में किसी भी स्थान पर जा सकेंगे। मालूम हो कि बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (ईडीएफसी) के न्यू भाउपुर-न्यू खुर्जा खंड तथा ईडीएफसी के संचालन नियंत्रण केन्द्र का उद्घाटन किया है। ईडीएफसी के तहत चलने वाली मालगाड़ियों का रेलवे स्टेशनों पर ठहराव नहीं किया जाएगा। इसके लिए पूरी तरह से अलग रेलवे ट्रैक पर चलने व जगह-जगह लॉजिस्टिक व वेयरहाउस पर ठहरने के लिए व्यवस्था की जा रही है।

एमएमटीएच से ट्रेन, बस और मेट्रो भी मिलेगी

बोड़ाकी रेलवे स्टेशन के पास स्थित एमएमटीएच परियोजना यात्रियों को रेल, सड़क और एमआरटीएस तक सुगम पहुंच के साथ एक परिवहन हब के रूप में काम करेगी। एमएमटीएच में अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी), स्थानीय बस टर्मिनल (एलबीटी), मेट्रो, होटल और खुले हरियाली युक्त स्थलों के लिए स्थान उपलब्ध होगा।

एक लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

प्रदेश में भविष्य में होने वाले विकास, एनसीआर के उप क्षेत्र और भीड़भाड़ से युक्त दिल्ली को सेवाएं देने वाले इलाकों में तेजी से बढ़ती आबादी को विश्वस्तरीय यात्री परिवहन सुविधाएं मिलेंगी। इन परियोजनाओं से 1,00,000 लोगों के लिए रोजगार पैदा होने का अनुमान है और आसपास के इलाकों में विकास के अवसरों पर इसका सकारात्मक असर होगा।

एक ही बिंदु पर कंपनियों और ग्राहकों को मिलेंगीं सभी सुविधाएं

ग्रेटर नोएडा में एमएमएलएच और एमएमटीएच परियोजनाएं ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे, एनएच 91, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस वे, यमुना एक्सप्रेस वे, ईस्टर्न एंड वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर्स के नजदीक हैं।दरअसल, लॉजिस्टिक हब के चयन के लिए सबसे जरूरी है कि ऐसी जगह हो जहां एक्सप्रेस-वे व हवाई मार्ग या बंदरगाह की व्यवस्था हो। ताकि वहां से खाद्यान व अन्य सामानों को लाने व ले जाने के लिए आसानी हो। केंद्र सरकार द्वारा ग्रेटर नोएडा में जहां यह मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब बनाया जा रहा है वहां से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर विश्वस्तरीय व भारत का सबसे बड़ा नोएडा अंतरराष्ट्रीय ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा बनाया जा रहा है। जिसके जरिए उत्पादित सामानों को तत्काल देश-विदेश भेजने की सुविधा होगी। यही नहीं प्रदेश के भीतर सड़क मार्ग के जरिए यमुना एक्सप्रेस वे से मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब तक पहुंचने में आसानी होगी।

यूपी में जहां हवाई यातायात की सुविधा बढ़ाने के लिए प्रदेश में 17 हवाई अड्डों को बनाने के लिए कार्य चल रहा है वहीं प्रदेश में पूर्वांचल एक्सप्रेस व अन्य चार एक्सप्रेस वे के जरिए प्रदेश में एक्सप्रेस वे का जाल बिछाया जा रहा है। सड़क अच्छी होने से उत्पादित वस्तुओं के परिवहन में आसानी तो होगी ही साथ ही साथ यातायात लागत में भी कमीं आएगी। प्रदेश में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर को देखते हुए देश-विदेश की कंपनियां अब यूपी का रुख कर रही हैं। एक्सप्रेस वे के जरिए पूरे प्रदेश से कंपनियों द्वारा कच्चा माल मंगाना हो या तैयार माल भेजना हो यह सब आसान हो जाएगा। पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए यूपी के भीतर ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के जरिए माल मंगाने पर उसके रखरखाव और पहुंच सुनिश्चित करने के लिए मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब की जरूरत महसूस की जा रही थी।

नोएडा में बनने वाला विश्वस्तरीय मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जरूरतों को पूरा करेगा। डीएफसी के निर्माण के बाद मालगाड़ियों के चलने का रूट अलग हो जाएगा। इससे पैसेंजर ट्रेनों के अधिकतर रूट पर मालगाड़ियां नहीं चलेंगी। डीएफसी के रूट पर चलने वाली मालगाड़ियों की स्पीड तो बढ़ेगी ही साथ ही उनकी माल ढोने की क्षमता भी करीब दोगुनी हो जाएगी। समय पर माल पहुंचने को लेकर कंपनियों के व्यापार का स्तर सुधरेगा व विश्वसनीयता बढ़ेगी। विभिन्न उद्योंगों द्वारा उत्पादित सामानों को उनके निर्यात के लिए गंतव्य तक पहुंचाने के लिए व सुरक्षित व संरक्षित करने की दृष्टि से मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब का योगदान अभिन्न होगा। साथ ही साथ यूपी में नए निवेशक भी आकर्षित होंगे। जिससे यूपी को औद्योगिक प्रदेश की दिशा में बढ़ने की राह औऱ आसान होगी।

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