हरियाली और पर्यावरण संग साल भर हरा चारा भी ,इस बार पौधरोपण में बेजुबानों का भी ख्याल

लखनऊ । इस बार के पौधरोपण में हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के साथ बेजुबानों का भी खासा खयाल रखा गया है। पौधरोपण के दौरान ऐसे पौधे भी लगाए जाएंगे जो साल भर हरा चारा भी उपलब्ध कराएं। खासकर तब जब चारे का सर्वाधिक संकट हो। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार मानसून के इस सीजन में चारा और शोभकार के जिन पौधों का रोपण होना है उनकी कुल संख्या 47242103 होगी।

फाईल फोटो -गुगल

इसमें औषधीय और पोषक तत्व वाले सहजन जैसे पौधे जिनका चारा के रूप में उपयोग हो सकता है उनको जोड़ दें तो यह संख्या और अधिक हो जाएगी। चारे के लिए जिन पौधों का रोपण होना है,उनमें कुसुम,बकैन, बबूल, कचनार, सिरस, परिजात और अगस्त आदि हैं। इनमें से बबूल और सहजन जैसे पौधे तो बहुउपयोगी हैं।

मालूम हो कि सरकार ने इस सीजन में 30 करोड़ पौधरोपण का लक्ष्य रखा है। पौधरोपण अभियान को सौ फीसद सफल बनाने के लिए पूरी तैयारी हो चुकी है। वन विभाग इसकी नोडल एजेंसी है। 26 अन्य विभाग इसमें सहयोग कर रहे हैं। इन विभगों को कुल 19.20 करोड़ पौध रोपड़ का लक्ष्य दिया गया है। बाकी 10.80 करोड़ पौधे वन विभाग लगाएगा।

कृषि जलवायु क्षेत्र के अनुसार हर जिले में लोगों की मांग के अनुसार समय से पौधे उपलब्ध हों, इसके लिए वन विभाग की 1813 पौधशालाओं में 42.17 करोड़ पौध तैयार किए जा चुके हैं। इसके अलावा रेशम और उद्यान विभाग भी अपनी नर्सरियों में पौध तैयार किए हैं।

सरकारी विभागों, विभिन्न अदालतों के परिसर, किसानों, संस्थाओं, व्यक्तियों, निजी और सरकारी स्कूलों, केंद्र सरकार के उपक्रमों, स्थानीय निकायों, रेलवे, रक्षा, औद्योगिक इकाइयों, सहकारी समितियों को पहले की तरह वन विभाग निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराएगा। पारदर्शिता के लिए जो विभाग पौधे लगाएगा वह उस जगह की जिओ टैंगिग भी कराएगा।

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद से हर साल रिकॉर्ड पौधरोपण हुआ है। इस क्रम में अब तक अलग अलग प्रजातियों के कुल 60,24,46,551 पौध लगाये जा चुके हैं। रिकॉर्ड पौधरोपण के कारण पिछले चार साल में उत्तर प्रदेश में वनावरण और वृक्षावरण दोनों में वृद्धि हुई है।

फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की स्टेट फारेस्ट रिपोर्ट 2019 के अनुसार उत्तर प्रदेश में 2017 की तुलना में वनावरण में 127 किलोमीटर की वृद्धि हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश का वृक्षावरण राष्ट्रीय औसत 2.89 फीसद की तुलना में 3.05 फीसद है।

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