खाली कराई जाएगी पोखरे की जमीन ,मजिस्ट्रेट बोले- लंबा चलेगा अभियान

शरद गुप्ता

गोरखपुर : में ताल सुमेर सागर के बाद असुरन पोखरे का मामला भी निस्तारण की दिशा में है। इसी के साथ अब सदर तहसील प्रशासन ने शहर के दो और क्षेत्रों में ऐसे पोखरे चिह्नित किए हैं जिनके करीब आधे हिस्से का कब्जा कर कच्चा-पक्का निर्माण कराया जा चुका है। दोनों ही स्थानों पर निर्माण कार्य रोक दिया गया है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व एसडीएम सदर गौरव सिंह सोगरवाल ने जीडीए और नगर निगम को पत्र लिखकर मामले का निस्तारण होने तक किसी भी निर्माण के लिए मानचित्र नहीं स्वीकृत करने के साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि वहां किसी भी तरह का विकास कार्य न हो सके। तहसील प्रशासन की तरफ से तालाब, पोखरे एवं जलाशय पर कब्जे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बाद अब आम लोगों ने भी कब्जे की जानकारी देनी शुरू कर दी है। इसी तरह की शिकायत छोटे काजीपुर और दौलतपुर से भी जुड़ी मिली थी।

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने लेखपालों की टीम से सत्यापन कराया तो पता चला कि दौलतपुर में 1.50 एकड़ में एक तथा छोटे काजीपुर में 1.70 एकड़ क्षेत्रफल में एक पोखरा है। पैमाइश में पता चला कि दोनों स्थानों पर 40 फीसदी से अधिक पोखरे की जमीन पर कब्जा हो चुका है। इन पोखरों को खाली कराने पर 100 से अधिक लोग प्रभावित होंगे। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/ एसडीएम सदर गौरव सिंह सोगरवाल का कहना है कि ताल सुमेर सागर से शहर के ताल, पोखरों की जमीन खाली कराने का शुरू हुआ अभियान चलता रहेगा। एक-एक कर सभी तालाब व पोखरों की कब्जा हो चुकी जमीन छुड़ाई जाएगी। शहर क्षेत्र में दौलतपुर एवं छोटे काजीपुर में दो पोखरों पर अतिक्रमण की जानकारी लेखपालों की जांच में सामने आई है। दोनों जगहों पर 30 से 40 फीसदी जमीन पर निर्माण किया गया है। इस समय चल रहे निर्माण कार्य रुकवा दिए गए हैं। जीडीए और नगर निगम को लिखा गया है कि वहां कोई नक्शा न पास हो और न ही कोई विकास कार्य कराया जाए। इस जमीन को खाली कराया जाएगा।

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