कोरोना कर्फ्यू से छूट वाले जिलों में पटरी पर लौटने लगी जिंदगी

10 जिलों को छोड़ सभी जिलों में सक्रिय रोगियों की संख्या 600 के नीचे

गिरीश पांडेय
उत्तरप्रदेश कोरोना की बुरी साया से मुक्ति की राह पर है। ऐसे में 600 से कम मानक वाले जिन जिलों को कोरोना कर्फ्यू से छूट मिल रही है,वहां के लोगों की ज़िंदगी तेजी से पटरी पर लौट रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस इनोवेटिव मॉडल के नाते स्थानीय जिला प्रशासन में खुद को छूट वाले मानक में लाने के लिए स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा मची है। लोग भी कोरोना प्रोटोकाल का अनुपालन कर इसमें भरपूर सहयोग कर रहे हैं। नतीजतन रोज कोई न कोई जिला छूट वाले मानक में शामिल हो रहा है। आज जारी आंकड़ों के मुताबिक मेरठ,सहारनपुर,लखनऊ, वाराणसी,गोरखपुर, गाजियाबाद,नोएडा, बुलंदशहर,बरेली को छोड़ किसी हर जिले में सक्रिय रोगियों की संख्या 600 से नीचे है। लिहाजा ये सभी कर्फ्यू से छूट के दायरे में हैं। बरेली, बुलंदशहर, नोएडा और गाजियाबाद में सक्रिय रोगियों ख्या 700 से नीचे है। लिहाजा ये भी शीघ्र ही छुट के दायरे में आ सकते हैं

चौबीस घंटे में नए संक्रमण के मामले सिर्फ 1175

कोरोना के हर फ्रंट से लगातार अच्छी खबरों के आने का सिसिला जारी है। 31 मई के बाद से एक दिन में आने वाले संक्रमण के नए केसेज की संख्या 1500 से नीचे बनी हुई है। आज उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे के दौरान नए केसेज की संख्या 1175 रही। कल यह 1268 थी। 24 अप्रैल को यह संख्या सर्वाधिक 38055 थी। इस दौरान स्वस्थ्य होने वालों की संख्या रही 3646। रिकवरी रेट सुधरकर 97.4 फीसद तक पहुंच गई। 30 अप्रैल को सक्रिय केसेज की संख्या रिकॉर्ड 3 लाख 10 हजार के करीब थी। आज यह घटकर 22877 पर आ गई। कल यह 25546 थी।
33 जिलों में एक भी मौत नहीं
प्रदेश 33 जिले ऐसे रहे जिनमे 24 घंटे के दौरान एक भी मौत नहीं हुई। 15 में सिर्फ एक एक हुईं। मेरठ,झाँसी, उन्नाव,ललितपुर,औरैया और रायबरेली में कोरोना संक्रमण से चार चार लोगों की मौत हुई। नौ जिलों में दो दो, छह जिलों में तीन तीन मौतें हुई। किसी भी जिले में नए संक्रमण के दहाई से ऊपर नहीं गए।
दो जिलों में एक भी मौत नहीं
श्रावस्ती और कानपुर देहात में संक्रमण शून्य रहा। मेरठ,कुशीनगर,नोएडा, गाजियाबाद में नए संक्रमण के मामले सर्वाधिक रहे।

*प्रभावी नियंत्रण के बावजूद सरकार सतर्क*

जीवन और जीविका के सम्मान में संक्रमण रोकने के लिए अन्य राज्यों की लॉक डाउन व्यवस्था से इतर योगी सरकार ने आंशिक कोरोना कर्फ्यू लगाया। टेस्ट, ट्रेस और ट्रीट को मूलमंत्र मानकर सर्विलांस पर पूरा फोकस किया। शासन के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए हर जिले में नोडल अधिकारी भेजे गए। प्रभारी मंत्रियों को प्रभार वाले जिलों में जाने के निर्देश के बाद सीएम योगी खुद भी ग्राउंड जीरो पर गए। यही वजह रही की काम समय और कम संसाधनों में प्रदेश में कोरोना संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण लग सका। इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन, नीति आयोग, मुंबई और इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोरोना प्रबंधन के योगी मॉडल की तारीफ की।

बावजूद इसके सरकार अब भी कोरोना को लेकर बेहद सतर्क है। सीएम योगी का साफ निर्देश है कि स्थानीय प्रशासन कोरोना कर्फ्यू के नियमों का कड़ाई से पालन कराए। रात्रिकालीन बन्दी को प्रभावी बनाने के लिए शाम छह बजे से ही पुलिस और स्थानीय प्रशासन सक्रिय हो जाएं। पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग करें। कहीं भी भीड़ की स्थिति न बने। छूट के तय समय में बाहर निकलने वालों से अनिवार्य रूप से कोरोना प्रोटोकाल का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए।

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