पूर्वांचल में शारदानंद ही दूर करते थे पिछड़ों की पीड़ाः जयप्रकाश

पूव मंत्री शारदानंद की 73वीं जयंति मनाई गई

विजय बक्सरी

बलियाः पूर्व विधायक जयप्रकाश अंचल ने कहा कि समाजवादी पुरोधा पूर्व मंत्री शारदानंद अंचल अपने पूरे राजनीतिक जीवन में पूर्वांचल के विकास पर विशेष ध्यान देते थे और खासकर पूर्वांचल के पिछड़ों के हर पीड़ा को दूर करने में अपनी पूरी ताकत झोंक देते थे। वे पूर्व मंत्री शारदानंद अंचल के 73वीं जयंती दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बोल रहे थे। कहा कि विकास के नजरिए से पिछड़े पूर्वांचल के अधिकांश जिलों में एक समय में पिछड़ा वर्ग के लोगों की सामाजिक प्रताड़ना भी खुब होती थी। उन दिनों पूर्वांचल में एकलौते समाजवादी नेता शारदानंद अंचल ही शोषितों के आवाज को बुलंद करते थे और गरीबों को न्याय के लिए वे दिग्गज राजनीतिक नेताओं से भी सीधे टक्कर लिया करते थे। लाकडाउन के कारण शारीरिक दूरी का पालन करते हुए रविवार को इस बार सीयर ब्लाक के मऊरहा चंदाडीह स्थित शारदानंद अंचल पाॅलिटेक्निक कालेज में जननायक पूर्व मंत्री शारदानंद अंचल की जयंती सादगी के साथ मनाई गई। जहां मौजूद शारदानंद अंचल के पुत्र व बैरिया के पूर्व विधायक जयप्रकाश अंचल, सीयर ब्लाक प्रमुख विनय प्रकाश अंचल आदि सपाजनों ने अंचल के तैलचित्र पर माल्यार्पणकर श्रद्धांजलि अर्पित की। सपाजनों ने कहा कि चार बार विधायक व तीन बार मंत्री रहे शारदानंद अंचल के बिना उनका पैतृक क्षेत्र बिल्थरारोड समेत पूरा पूर्वांचल राजनीतिक रुप से अनाथ सा हो गया है। क्षेत्र का विकास रुक गया है और कमजोर, शोषितों व पिछड़ों की आवाज कमजोर पड़ गई है। पूर्व विधायक जयप्रकाश अंचल ने सभी सपाजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अपने पिता व समाजवादी नेता शारदानंद अंचल के राजनीतिक तेवर को सजीव रखने का संकल्प दोहराया। इस दौरान सीयर ब्लाक प्रमुख विनय प्रकाश अंचल, सपा नेता व जिपं सदस्य राजनाथ यादव, अमरजीत यादव, रामजी यादव, बबन यादव, प्राचार्य अरुण कुमार, हरेराम यादव, द्वारपाल साहनी, लाल बहादुर यादव, विनित कुमार, केके गुप्ता, अक्षय कुमार, बसंत यादव, सिद्धार्थ, रामकृपाल कवि व अमर सिंह आदि मौजूद रहे।

मरते दम तक समाजवाद का झंडा लहराते रहे शारदानंद अंचल

गरीबों को अपने हक के लिए लड़ने, जूझने व सम्मान के लिए तुफान से भी टकरा जाने का जज्बां जगाने वाले बलिया के शारदानंद अंचल ने मरते दम तक समाजवाद का झंडा लहराया किंतु बलिया में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा न होने के कारण अचानक हृदयघात से सन 2010 में समाजवाद का यह मजबूत सिपाही महज 63 वर्ष की अवस्था में जिंदगी की जंग हार गया। उनके जाने के साथ ही पूरे पूर्वांचल के शोषित, गरीब व जरुरतमंद अंचल बिन पूरी तरह से बेजुबान सा हो गए। आज स्व. अंचल के जाने के करीब एक दशक पूरा हो गए किंतु उनके प्रति आस्था व विश्वास क्षेत्र में आज भी अटूट है और उनकी स्मृतियां हर बलियावासी के जेहन में जिंदा है। बलिया जनपद के बिल्थरारोड तहसील के पशुहारी गांव में सामान्य किसान के घर जन्मे स्व. अंचल सदैव समाजवादी नेता पूर्व पीएम चैधरी चरण सिंह व राममनोहर लोहिया की राजनीति से प्रभावित रहे और स्वयं किसानों, गरीबों व बेसहारों के दर्द को देख कराह उठते थे। मानवीय संवेदना को लेकर इतने सजग थे कि लोगों की समस्या के निदान तक वे अपनी पूरी ताकत झोंक देते थे और गरीबों को प्रताड़ित करने वाले हर सामंती चट्टान से टकराने के लिए स्वयं मजबूत हथौड़ा बन जाते थे। छात्र जीवन से ही युवाओं के लड़ाई को भी लड़ते रहे। जिसके बाद वे अपना राजनीतिक सफर कापरेटिव राजनीति से शुरु की। सहकारिता आंदोलन से जुड़े तो किसानों के दर्द को राष्ट्रीय पटल तक पहुंचाया। लोकदल, जनता दल से लेकर समाजवादी पार्टी के गठन तक वे सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे और बाद में सपा के जिला से लेकर प्रदेश स्तर के विभिन्न पदों पर अपनी प्रमुख भूमिका निभाई। बाद में नेता जी मुलायम सिंह यादव के निर्देश पर पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र व मध्यप्रदेश में भी पार्टी को मजबूती से खड़ा किया। पश्चिम बंगाल में तो अपने नेतृत्व क्षमता से उस समय के कई दिग्गज राजनेताओं को वैचारिक रुप से सपा के झंडे तले आने को विवश कर दिया। वहीं इनके नेतृत्व में महाराष्ट्र व मध्य प्रदेश में तीन-चार विधायक भी सपा के खाते में आ गए। जिसके कारण वे सदैव नेता जी के विश्वासपात्र व करीबी रहे।

चार बार विधायक व तीन बार यूपी सरकार में मंत्री थे शारदानंद अंचल

1985 में इंदिरा गांधी की हत्या के कारण देशभर में कांग्रेस की जबरदस्त सहानुभूति लहर के बावजूद अपने बूते लोकदल से शारदानंद अंचल पहली बार सीयर विधानसभा से विधायक हुए। उसके बाद 1989 में जनता दल से 1993 व 2002 में सपा से विधायक बनकर चार बार सदन तक पहुंचे। इसमें वे तीन बार पीडब्ल्यूडी-बेसिक शिक्षा, पशुधन व मत्स्य एवं सहकारिता मंत्री रहे। बतौर सहाकरिता मंत्री अंचल ने जहां साधन सहकारी समितियों को दुरुस्त किया, वहीं आर्थिक पैकेज का प्लान बनाकर किसानों को भी सीधे लाभ पहुंचाया। बतौर शिक्षा मंत्री भी पूर्वांचल के ग्रामीण क्षेत्र में सबसे ज्यादा इंटर व डिग्री कालेज की स्थापना कराया। ताकि ग्रामीण इलाकों के प्रतिभाओं को गांव में भी उच्च शिक्षा मिल सके और हर परिवार शिक्षित बन सके। अपने कार्यकाल में उन्होंने अपने गृह क्षेत्र को तहसील का दर्जा दिलवाने के साथ ही सड़क, बिजली, पानी के साथ ही रोडवेज सुविधा, रोडवेज डीपो, मंडी व अन्य बड़ी योजनाओं को पूरा कराया। बलिया समेत पूर्वांचल के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में पीएचसी व न्यू पीएचसी की भी स्थापना कराया किंतु बलिया की क्षेत्रीय राजनीति के कारण चाहकर भी बलिया में स्वास्थ्य की कोई बेहतर सुविधा न हो सकी। 2 मई 2010 को वे सुबह ही लखनऊ से सीधे बिल्थरारोड सपा के कार्यकर्ता सम्मेलन में ही भाग लेने को पहुंचे किंतु अचानक सीने में दर्द होने के कारण कार्यक्रम स्थल से घर की ओर उन्हें ले जाया गया। समय पर आवश्यक ट्रीटमेंट न मिलने से घर पहुंचने से पहले ही उनका निधन हो गया। जिसके साथ ही समाजवाद का यह मजबूत सिपाही सदा के लिए विदा हो गया।

अंचल नाम के छाव में तीसरी पीढ़ी भी राजनीति में फिट

करीब तीन दशक तक प्रदेश के समाजवादी राजनीति का धु्रव तारा बने स्व. शारदानंद अंचल के नाम की छाया में आज उनकी तीसरी पीढ़ी भी राजनीति में पूरी तरह से जम चुकी है। स्व. अंचल की पत्नी शीतला देवी तो सहानुभूति लहर में पहली बार यहां सीयर ब्लाक प्रमुख भी रह चुकी है। हालांकि स्व. अंचल का गृह विधानसभा क्षेत्र बिल्थरारोड के सुरक्षित हो जाने पर इस परिवार को राजनीति में स्वयं को फिट करने को काफी मशक्कत करना पड़ा। बावजूद पिता के राजनीतिक विरासत को संभालते हुए जयप्रकाश अंचल सन 2012 में तत्कालीन सपा सरकार में बैरिया से विधायक की पारी सफलतापूर्वक खेल चुके है। वहीं जयप्रकाश अंचल के पुत्र व स्व. अंचल के पौत्र विनय अंचल वर्तमान में सीयर ब्लाक के प्रमुख है।

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